


साप्ताहिक सत्संग
Next Satsang Venue
SHRI ANAND AHUJA
Date of Satsang: 15/02/2026
Timing: 04:00PM – 06:00PM
Maddi Ka Bazar, Gwalior
Contact: 06265162636
ग्वालियर वर्ष 2026 सूचनार्थ पर्व सूची उत्सव
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आपके सेवार्थ बाबा कालूराम जी महाराज एवं बाबा शंकर लाल जी महाराज की वेबसाइट www.babashankarlaljimaharaj.com
सम्पर्क सूत्र :-
मोबाइल नं. +919893016640, +919981565202 -
बसंत पंचमी 23.01.26 शुक्रवार विरहआश्रम
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2.महा शिवरात्री 15.02.26 रविवार कुतवार (भोग)
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3.पुण्य तिथि – बाबा शंकर लाल जी महाराज 21.02.26 शनिवार बिरहरुआ आश्रम (भोग)
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4.भंडारा – बाबा कालूराम जी महाराज 15.03.26 रविवार कुतवार
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5.रामनवमी 27.03.26 शुक्रवार कुतवार (भोग)
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6.हनुमान जयंती 02.04.26 गुरुवार बिरहरुआ आश्रम
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7.जन्मोत्सव समर्पण – बाबा शंकर लाल जी महाराज 14.05.26 गुरुवार विरहरूआ
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8.गुरु पूर्णिमा 29.07.26 बुधवार कुतवार एवं बिरहरुआ आश्रम
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9.भंडारा – बाबा हरिप्रसाद जी महाराज 29.08.26 शनिवार महुआ
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10.श्रीकृष्ण जन्मोत्सव 05.09.26 शनिवार बिरहरुआ आश्रम
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11.श्रीकृष्ण नवमी 05.09.26 शनिवार कुतवार (भोग)
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12.भंडारा कुतवार – बाबा शंकर लाल जी महाराज 30.09.26 बुधवार विरहरूआ आश्रम
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13.दीपावली पूजन 08.11.26 रविवार कुतवार एवं बिरहरुआ आश्रम
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14.भंडारा – बाबा लज्जाराम जी महाराज 20.12.26 रविवार चांदपुर
संत शिरोमणी बडे बाबा कालुराम जी महाराज : प्रारंभिक परिचय
श्री समर्थ 108 श्री बड़े बाबा कालूरामजी महाराज का जन्म सम्वत् 1907 विक्रमी (सन् 1850 ई.) में गाँव कोतवाल राज्य ग्वालियर में हुआ था। कोतवाल का प्राचीन ऐतिहासिक नाम कुन्तलपुर है जहाँ पर भक्त राजा चन्द्रहास का जन्म द्वापर में हुआ था। इसी स्थान पर कुन्ती ने सूर्य देवता का आव्हान करके महारथी कर्ण को जन्म दिया था। कर्ण का जन्म स्थान ‘सुजवार’ आज भी वहाँ पर आसन नदी के तट पर है। श्री बड़े बाबा महाराज के पूर्वजों का निवास तजावर ग्राम से है जो क्यारी और चम्बल नदियों के बीच बसा हुआ है।
श्री समर्थ गुरुदेव बाबा शंकर लाल जी महाराज : प्रारंभिक परिचय
इन्ही संत शिरोमणी बाबा कालुराम जी महाराज के इक्लौते साधू शिष्य बाबा शंकरलाल जी महाराज हुए।
श्री समर्थ गुरुदेव बाबा शंकर लाल जी महाराज का जन्म श्री प्यारेलाल जी चित्रगुप्त वंशीय कुल के यहां ग्राम हिम्मतपुर (बृज) जिला आगरा मे ज्येष्ट बदी द्वादशी संवत 1923 (सन 1866) को हुआ । इनके पूज्य पिताजी बड़े सदाचारी शांति प्रिय तथा धनी व्यक्ति थे। अपनी इन खूबियों के कारण ग्राम तथा आस-पास दूर तक बड़े आदर की दृष्टि से देखे जाते थे। आज भी यह स्थान दर्शनीय है व इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण देता है।