Baba Shankar Lal Ji Maharaj

दीनानाथ मेरे बाबा शंकर

Late Shri Ashok Shithole   (Kavishas)   हरिहर हरिहर जय बाबा महाराज की बाबा की कृपा से यह भजन 1978 में शुरू हुआ एवं गंगा दशेहरा 2015 को बाबा जी कि कृपा से पूर्ण हुआ दीनानाथ मेरे बाबा शंकर, दीनन के हितकारी जो सुमिरे उन को सुख पाये, भूले दुख वो भारी दीनानाथ मेरे बाबा शंकर मैं पतित हू आया द्वारे, दे दे कृपा के दरश नियारे तुम सेवक के मन को जानो, ऐसे गुरु महान दीनानाथ मेरे बाबा शंकर पूजन अर्चन पास न कोई, बस दर्शन की आस संजोई तेरा दर्शन मैं नित पाऊ, ऐसा दो वरदान दीनानाथ मेरे बाबा शंकर नैया फंसी है बीच मझारे, कर दो दया से उस को किनारे तुम डूबत को खूब बचाते, ऐसे कृपा निधान दीनानाथ मेरे बाबा शंकर मेरा नही है कोई सहारा, दे दे वचन का अटल सहारा तुम संकट में साथ निभाते, वचन का रखते मान दीनानाथ मेरे बाबा शंकर मैं बालक तुम पिता हमारे, पग पग मिले हैं संकेत दुलारे प्यार की छाव बढा दी इतनी, बहन लगे अश्रु के धारे दीनानाथ मेरे बाबा शंकर राधे भजू मैं श्याम भजू मैं, तेरा सुंदर नाम भजू मैं तेरे नाम की महिमा गाऊ, रात सुबह और शाम दीनानाथ मेरे बाबा शंकर माता पिता हो बंधु सखा हो, इस जीवन के आराध्य सदा हो तेरे पथ पर चलता जाऊ, प्राण का हो उद्धार दीनानाथ मेरे बाबा शंकर कविशस की इच्छा चरणो में अशोक सिथोले “कविशस”

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